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हमने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन,

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ख़ाक हो जायेंगे हम तुमको ख़बर होने तक !!

Mirza Asadullah Khan (Ghalib)-27-12-1797(Agra) To 15-02-1869 (Delhi)

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Ghazals Of Ghalib

The Almighty Of Rekhta

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My Dear Friends,



Here I am going to share with you my life long compilation of the couplets ( Two liners or Shairees ) composed by renowned poets of Urdu literature.
This process is got delayed due to the notebooks consisting of those couplets were not traceable.Now I have found those and come to you to share.
Now enjoy those and let me know through the Guest-Book.
Thank you.
Rabindranath Banerjee(Ranjan)
_________

 



(१)
बात कहने की हमेशा भूले,
लाख अंगुषत पे धागा बांधा (मुहसिन भोपाली)


(२)
बीते दिनों का अक़्स न आइन्दा का ख्याल ,
बस खाली खाली आँखों से देखा किये मुझे (____)


(३)
मुस्कुराना किसे अज़ीज़ नहीं,
डरते हैं ग़म के इंतिक़ाम से हम (खुमार बाराबनकवी)


(४)
फरिश्तों की ज़बीं झुकती थी "बिस्मिल" जिनके क़दमों पर.
वो इन्सां मर गया सजदागुजार-ए-ई-ओ-आ होकर (बिस्मिल सईदी)


(५)
इतनी भी बुरी है बेक़रारी,
अब आपसे उंस कम करेंगे (शेफ़्ता)


(६)
मुद्दतों बू-ए-वफ़ा आएगी बुतखानों से,
ऊद बन बन के जला है दिल-ए-सोजां मेरा(सीमाब)


(७)
शौक-ए-दीदार का क्यों उनसे एआदा न करें,
लाओ वो काम करें हम,जिसे मूसा न करे(सीमाब)


(८)
मज़लिस में मेरे ज़िक्र के आते ही उठे वो,
बदनामी-ए-उशशाक़ का एज़ाज़ तो देखो(मोमिन)


(९)
मैं इसे किसी की वफ़ा कहूं कि "शकील" ऐन ज़फ़ा कहूं,
अगर एक बार हंसा दिया तो हज़ार बार रुला दिया(शकील बदायुनी)


(१०)
घरों में नाम थे नामों के साथ ओहदे थे,
बहोत तलाश किया कोई आदमी न मिला(बशीर बद्र)

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