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हमने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन,

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ख़ाक हो जायेंगे हम तुमको ख़बर होने तक !!

Mirza Asadullah Khan (Ghalib)-27-12-1797(Agra) To 15-02-1869 (Delhi)

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Ghazals Of Ghalib

The Almighty Of Rekhta

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Famous Couplets-3




(21)
इसी कौकब की ताबानी से है तेरा जहाँ रौशन,
ज़वाल-ए-आदम-ए-खाकी,जियाँ तेरा है या मेरा ! (इक़बाल)

(22)
इक बार दोस्तों पे ज़रा ऐतबार कर,
फिर पीठ पे तेरी खंज़र भी आएगा ! (आबिद साबरी)

(23)
ज़ुल्मत-ए-शब से न हो खाइफ कभी,
इज़न देती है ये सुबह-ए-नौ की चाप ! (साबिर इक़बाल)

(24)
ख़िज़ाँ के दौर में ऐसे भी कुछ मक़ाम आए ,
गुलों पे वक़्त पड़ा है तो खार काम आये ! (राज़ इलाहाबादी)

(25)
न क्यों छा जाए "सूफी" खीरगी सी चश्म-ए-महफ़िल पर ,
पिरोये हैं ग़ज़ल में कीमती लाल-ओ-गुहर मैंने ! (सूफी बाणकोटी)


(26)
राज़-ए-हयात पूछ ले ख़िज़्र-ए-खुजस्ता गाम से ,
ज़िंदा हर एक चीज़ है कोशिश-ए-नातमाम से ! (इक़बाल)

(27)
दिल के खूं होने की जब बात चली ,
उसकी खुशबू-ए-हिना याद आई ! (हमीद अल्मास)

(28)
तुमने तो थक के दश्त में ख़ैमे लगा लिए,
तनहा कटे किसी का सफर तुमको इससे क्या ! (परवीन)

(29)
फिर एकबार मिलें हम खुली फ़िज़ाओं में ,
मैं अपने खोल से निकलूं तू अपने घर से निकल ! (ज़फर गोरखपुरी)

(30)
ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है खौफ,
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम ! (जोश मलीहाबादी)

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